श्री काली चालीसा (संस्कृत) – हिन्दी अर्थ सहित
भूमिका
श्री काली चालीसा माँ काली की उपासना का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। माँ काली शक्ति, समय और परिवर्तन की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे अज्ञान, भय, अहंकार और नकारात्मकता का नाश कर भक्त को आत्मबल, साहस और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती हैं। काली चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्मविश्वास और जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्रदान करता है। इस ब्लॉग में हम श्री काली चालीसा (संस्कृत) को सरल हिन्दी अर्थ सहित प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि पाठक इसका भावार्थ भी गहराई से समझ सकें।
माँ काली का आध्यात्मिक महत्व
माँ काली को काल की भी अधिष्ठात्री माना जाता है। उनका उग्र स्वरूप केवल संहार का नहीं, बल्कि असत्य और अधर्म के अंत का प्रतीक है। वे अपने भक्तों पर सदैव करुणामयी रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से माँ काली का स्मरण करने से भय, तंत्र-बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति दूर होती है।
श्री काली चालीसा (संस्कृत) – हिन्दी अर्थ सहित
दोहा (संस्कृत)
जयन्ति मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
मंगलस्वरूपिणी, भद्रकाली, कपाल धारण करने वाली माँ काली की जय हो।
हे दुर्गा, क्षमाशील, शिवप्रिया और सृष्टि को धारण करने वाली माता! आपको बार-बार नमन।
चौपाई 1
जय जय काली महाकाली।
भवभयहारिणि करुणा शाली॥
अर्थ:
हे महाकाली! आपकी जय-जयकार हो।
आप संसार के समस्त भय को हरने वाली और करुणामयी हैं।
चौपाई 2
शिवशक्तिस्वरूपा माता।
भक्तहिताय सदा सुखदाता॥
अर्थ:
आप शिव की शक्ति स्वरूपा हैं।
आप सदैव भक्तों का कल्याण करती और उन्हें सुख प्रदान करती हैं।
चौपाई 3
खड्ग खप्पर कर शोभा धारी।
मुण्डमाल विराजे भारी॥
अर्थ:
आपके हाथों में खड्ग और खप्पर सुशोभित हैं।
आप गले में मुण्डमाला धारण किए हुए हैं।
चौपाई 4
कालरूपिणि कालिका माता।
दुष्ट विनाशन जग विख्याता॥
अर्थ:
हे कालस्वरूपिणी कालिका माता,
आप दुष्टों के विनाश के लिए प्रसिद्ध हैं।
चौपाई 5
रक्तबीज संहार करि लीन्हा।
भक्तन को भयमुक्त कीन्हा॥
अर्थ:
आपने रक्तबीज का संहार किया।
और अपने भक्तों को निर्भय बनाया।
चौपाई 6
चण्डमुण्ड मर्दनकारी।
महिमा आपकी अपरम्पारी॥
अर्थ:
आप चण्ड और मुण्ड का वध करने वाली हैं।
आपकी महिमा अनंत और अपार है।
चौपाई 7
जो जन मन से ध्यान लगावे।
सो नर भवसागर तर जावे॥
अर्थ:
जो भक्त सच्चे मन से आपका ध्यान करता है,
वह संसार रूपी सागर से पार हो जाता है।
चौपाई 8
भक्ति भाव से जो गुन गावै।
काली माता काज बनावै॥
अर्थ:
जो श्रद्धा से आपके गुणों का गान करता है,
माँ काली उसके सभी कार्य सिद्ध करती हैं।
चौपाई 9
निशदिन नाम जपे जो कोई।
दुख दरिद्र भय रहै न सोई॥
अर्थ:
जो दिन-रात आपका नाम जपता है,
उसके जीवन में दुःख, दरिद्रता और भय नहीं रहते।
चौपाई 10
काली चालीसा जो पढ़ि गावै।
सर्व संकट से मुक्त हो जावै॥
अर्थ:
जो श्रद्धा से काली चालीसा का पाठ करता है,
वह सभी संकटों से मुक्त हो जाता है।
दोहा (संस्कृत)
काली कृपां करोतु मे।
सदा भक्तस्य रक्षिका॥
अर्थ:
माँ काली मुझ पर कृपा करें
और सदा अपने भक्तों की रक्षा करें।
काली चालीसा पाठ के लाभ
- भय, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव से मुक्ति
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
- शत्रु बाधा और तांत्रिक प्रभाव से सुरक्षा
- आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति
काली चालीसा पाठ करने की विधि
- प्रातः या रात्रि में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- माँ काली के चित्र या मूर्ति के समक्ष दीपक जलाएँ
- शांत मन से काली चालीसा का पाठ करें
- पाठ के अंत में माँ से क्षमा और कृपा की प्रार्थना करें
निष्कर्ष
श्री काली चालीसा केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि भय से निर्भयता की यात्रा है। संस्कृत श्लोकों की शक्ति और उनके हिन्दी अर्थ का भाव समझकर किया गया पाठ भक्त के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। यदि आप माँ काली की कृपा पाना चाहते हैं, तो नियमित श्रद्धा और विश्वास के साथ काली चालीसा का पाठ अवश्य करें।
🙏 जय माँ काली 🙏